हिंदी का अपमान करो मत

हिंदी का अपमान करो मत ॥
हिंदी से हिन्दुस्तान है ॥
हिंदी अपनी मात्र भाषा ॥
हिंदी भारत की जान है ॥
सँस्कार यहाँ का देखो ॥
जो गाँव गाँव में बसता है ॥
रहन सहन और चाल ढाल का ॥
अजब अनोखा रिश्ता है ॥
गुरु जनो जो ग्रंथ लिखे है ॥
वे दुर्लभ और महान है ॥
हिंदी अपनी मात्र भाषा ॥
हिंदी भारत की जान है ॥
आन मान मर्यादा का ॥
ख्याल हमेशा करते है ॥
सच के पथ पर चलते रहते ॥
पथ से नहीं बिछड़ते है ॥
बल पौरुष धन दौलत है ये ॥
यही यहाँ की शान है ॥
हिंदी अपनी मात्र भाषा ॥
हिंदी भारत की जान है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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