फ़ूल हो तुम खार मैं

फ़ूल हो तुम खार मैं

फ़ूल हो तुम खार मैं, कितना अलग है।
जीत हो तुम हार मैं, कितना अलग है।

एक ही बूटे पे हम दोनों खिले हैं।
प्यार तुम इन्कार मैं, कितना अलग है।

साज़ तेरी ताल पे सरगम बजाते।
अनकसा इक तार मैं कितना अलग है।

है बड़ी आसान तेरी ज़िंदगानी।
हूँ बड़ा दुश्वार मैं, कितना अलग है।

है बहारों का डेरा तेरा नशेमन।
शाद तू, बेज़ार मैं, कितना अलग है।

फ़ूल हो तुम खार मैं, कितना अलग है।
जीत हो तुम हार मैं, कितना अलग है। ❖❖❖

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