मुश्किल नहीं है याद करना

मुश्किल नहीं है याद करना

‘प्रकाश’
मोहन को एक शिकायत है। वह कहता है कि कितना ही याद किया जाए, मगर मुझे याद नहीं होता है। काश मुझे ऐसी तरकीब मिल जाती कि मैं बिना ज्यादा मेहनत किए ही जल्दी से याद कर लेता।
”वाकई तुम ऐसी तरकीब जानना चाहते हो”, कमल ने पूछा तो मोहन बोला, ”क्या तुम्हारे पास ऐसी कोई तरकीब है?”
”हां! है,”
कमल ने कहा- ”रोज 8 से 10 घंटे पढ़ो तो तुम्हें याद होना शुरू हो जाएगा।”
याद होने का अपना विज्ञान है। हमें वही बातें याद होती है जो रुचिकर हो, जिनका हमारे जीवन में गहरा संबंध हो। जिसे हम याद करना चाहते हैं, जिंदगी में उसे दोहराते रहते हैं। जिस किसी को कोई आदत, हाव-भाव या कोई चीज या स्टाइल हमें पसंद आ जाती है, वह चीजें हमें याद रहती है।
याद करने का सीधा—सरल तरीका है कि हम पढ़ी हुई चीजों को दोहराना सीखें। दोहराने से स्मृति में बातें बैठती है। यह जरूरी है कि हम बिना उत्साह खोए दोहराना सीख ले। उसके लिए निम्न बातों को ध्यान में रखकर याद करना जरूरी है।
प्रश्न को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें। यानी एक प्रश्न के कई छोटे प्रश्न बना लें।
यथा— संविधान की परिभाषा देते हुए उसकी विशेषता बताइए। इस प्रश्न के तीन प्रश्न बना लें।
पहला— संविधान का अर्थ बताइए।
दूसरा— संविधान की परिभाषा दीजिए।
तीसरा— संविधान की विशेषताओं को बिंदुवार व्यक्त कीजिए।

उक्त तीनों प्रश्नों के सम्मिलित उत्तर, पूछे गए प्रश्न का उत्तर होंगे।
यही कार्य याद करने में करें। पहले प्रश्न पढ़ें। फिर उनके संकेत बिंदु लिखें। तब प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को एक दो पंक्तियों में लिख लें। उसके बाद विस्तार दें। तब पूरा उत्तर लिखें।
मसलन— प्रश्न है— प्रजातंत्र का अर्थ बताते हुए उसकी परिभाषा
दीजिए।
इस प्रश्न का पहला उत्तर होगा— 1. प्रजातंत्र का अर्थ, 2. प्रजातंत्र की परिभाषा। यह बिंदुवार उत्तर याद कर लें। फिर, इस उत्तर को विस्तार दे दें।
इसके बाद, उत्तर को चार प्रकार से लिखना सीख लें।
पहला— वस्तुनिष्ठ प्रश्न का उत्तर एक शब्द में दिया जाता है। इसके अंतर्गत रिक्त स्थान की पूर्ति, विकल्प और सही गलत वाले प्रश्न आते हैं।
दूसरा— अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर एकदो पंक्तियों के होते हैं।
तीसरा—लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर चारपांच पंक्तियों के दिए जाते हैं।
चौथा— दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर 1 से 10 पृष्ठों तक के होते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तरों को मिलाकर दीर्ध उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर बन जाता है। इसलिए एक दीर्ध उत्तरीय प्रश्न की बजाय चार लघु उत्तरीय प्रश्नों को याद कर लेना चाहिए।
उत्तर लिखते वक्त शब्द सीमा का ध्यान रखें। एक पंक्ति में औसतन 10 शब्द आते हैं। अति दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर 10 से 20 शब्दों के होते हैं। यानी एक या दो पंक्तियों के उत्तर होते हैं।
गणित, भौतिकी और रसायन शास्त्र में सूत्र की उत्पत्ति समझ लें। उसे हल करें। तब आंकिक प्रश्न हल करें। जब तक प्रश्न/उत्पत्ति समझ में ना आए तब तक उसे समझें। तभी इनके अंकित प्रश्न हल हो पाएंगे।
करके देखें। चित्र बनाएं। चित्रात्मक प्रश्नों में चित्र को दोहराएं। उत्तर लिखें।
चित्र को उत्तर से जोड़ें। मन ही मन उसकी कल्पना करें। उत्तर पढ़ें। चित्र से उन्हें मिलाएं। इसे दोहराएं।
नियमित समय से पढ़ें। समय सारणी बनाएं। कठिन, सरल, फिर कठिन के हिसाब से विषय जमाएं। इसी हिसाब से अध्ययन करें।
उत्तर लिखने के पहले रूपरेखा तय कर लें। प्रश्न पढ़कर सोचें। उसमें क्या पूछा गया है? तब उसका उत्तर बिंदुवार लिखें।
यही नियम हर विषय में अपनाए जा सकते हैं। इनका पालन करने से उत्तर शीघ्रता से याद होगा। यही याद करने का सरल, सहज और मजेदार तरीका है। इसे अपनाकर पढ़ाई को आनंददायक बनाया जा सकता है। ❖❖❖

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