गाँव को अपने सजाना है

गाँव को अपने सजाना है

नहीं मुझे है चाँद पर जाना ||
न तारे तोड़ कर लाना है ||
यही मेरी एक इच्छा है ||
गाँव को अपने सजाना है ||

सड़क गाँव चकरोड चकाचक ||
नलके नाला नाली ||
स्वाथ्य शिक्षा पर ध्यान विशेष हो ||
ख़ुशी रहे हर प्राणी ||
भेद भाव का फर्क रहे न ||
मौसम रहे सुहाना है ||
यही मेरी एक इच्छा है ||
गाँव को अपने सजाना है ||

पार्क बने बच्चो के खातिर ||
किया करे खूब क्रीड़ा ||
गरीब किसान रहे न चिंचित ||
न मिले किसी को पीड़ा ||
अफसर बने गाँव लड़के ||
सब सुविधा यहाँ पर लाना है ||
यही मेरी एक इच्छा है ||
गाँव को अपने सजाना है ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

This Post Has One Comment

  1. तहेदिल से शुक्रिया हिंदी लेखक के सभी सदस्यो को

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