बहुत याद आते हैं

बहुत याद आते हैं

जो मैं इन कदमों को ज़रा सा पीछे लेलूं तो
बीते हुए कुछ सफर आज भी बहुत याद आते है।

मैं उस गुजरे हुए कल को ज़रा टटोलूं तो
कुछ गुजरी हुई हसीन बाते बहुत याद आते है।

न कभी वक्त रुकता है न कीसिके कदम रुकते हैं
पर कुछ कदमों के आहट अब तक बहुत याद आते है।

जब कभी मैं देर रात तक सोना पाऊं तो
वो कुछ हसीन किस्से बहुत आज भी याद आते है।

करवट बदल बदल राते गर मैं गुजारूं तो.
जीवन के कुछ हिस्से अब भी बहुत याद आते है।

अंधेरी रातों को जो चिर कर मैं निकलूं तो
किरणों में छुपी कुछ चमकती उम्मीदें बहुत याद आते है।

सुबह की पहली अंगड़ाई जो मैं लेलू तो
बीती हुई वो सारी कहानियां बहुत याद आते है।

ऊंची उड़ान भरने को अपना पंख जो मैं खोलूं तो.
मेरे कुछ सुनहरे सपने आज भी बहुत याद आते है।

जो मैं इन कदमों को जरा सा पीछे लेलूं तो
बीते हुए कुछ सफर आज भी बहुत याद आते हैं।।
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