हेनन और मैं

हेनन और मैं

इस गाँव की कोई यादें नहीं है। यादें नहीं हैं क्योंकि बाशिंदे नहीं हैं। बाशिंदे नहीं हैं, इसीलिये यादें भी नहीं हैं। फ़लसफ़ा नहीं है, मोजज़ा नहीं है, तकल्लुफ़ नहीं है, हया नहीं है, पर दो लोग हैं जो टिके हुए हैं मैं और हेनन।

हम साथ बढे हुए इसी गाँव की गलियों में। अब वो मुझे इमारत दर इमारत ढूंढती है और मैं उसे दर-ओ-दीवार। खोना छोटा शब्द है, खोये नहीं है हम। हम बस भूल गये हैं, भूल चुके हैं, भूलना चाहते हैं। पर याद रखने को है कौन बस मैं और हेनन।

हेनन ने मुझे गुड़िया दी थी, लड़का होने के बावजूद गुड़िया दी थी, हीं-हीं। मैंने भी उसे पतंग दी थी, बिना तंग बंधी। वो तंग बांधना नहीं जानती थी पर फिर वो पतंग कटी कैसे? स्कूल बंद हैं, अरसे से कॉलेज खुले नहीं कोई काम पर नहीं जा रहा। ये हेनन कहाँ जा रही है मैं नहीं हूँ वहाँ जहाँ वो जा रही है। रोको-रोको! प्लीज़ कोई रोको उसे।

हाह…! हेनन जब तेरह की थी तब मैं भी तेरह का ही था। उसकी चाल मेरी सोच से मेल खाती थी। हम दोनों के तेवर आवारा थे, बाग़ी थे, ख़ाली और मवाली थे। हेनन की सोच मुझसे ज़्यादा खुली थी। उसे पता था दुनियाँ ख़त्म होनी ही है। वो ज़्यादा सोचती भी नहीं थी। उसने पहले से कह रखा था। जब सब ख़त्म हो जाये तो उसे कहाँ ढूंढा जाये। उसने सिर्फ़ मुझे बताया था, बताया था तो सही पर क्यों बताया था।

शहर को पानी पी गया क्योंकि उन्होंने बाँध तोड़ दिया था, पीने को शहर में पानी न रहा। जो जा सकते थे गये, जो रुक सकते थे मरे। मैंने हेनन की प्यास समझी पर बुझाई नहीं। लोग देखते थे वो ज़िंदा थे, वो हिलते थे, उनके होंठ फड़फड़ाते थे, लेटे-लेटे ही सही। हेनन ने कहा “यहाँ अब मन नहीं लगता, कहीं चल सकते हैं?” मैंने उसे धक्का दे दिया वो ऊँचाई से गिरी उसकी टाँगे टूट गयी। वो मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती मैं उसे वैसे भी नहीं छोड़ सकता। बाक़ी सब बोलते नहीं बोल-बोल कर ठन्डे हो गये।

गुड़िया से मैं और हेनन रोज़ खेलते हैं, तंग बांधना हेनन को अभी तक नहीं आया। मैं जब भी मिलता हूँ उसे सिखाता तो हूँ पर उसे सीखना ही नहीं है क्योंकि फिर वो हेनन नहीं रहेगी। पतंगे अब भी उड़ती हैं उन्हें कौन उड़ाता होगा। कहीं वो ऊँचे पहाड़ से ख़ुद तो नहीं कूद पड़ती ऐसा ही होगा, शायद ऐसा ही है।

मैं धुंध छटने का इंतज़ार कर रहा हूँ हेनन उसी धुंध में खोती जा रही है वो फेड होती जा रही है और मैं डार्क शेड में जी रहा हूँ। गली के बल्ब अब रोशनी की बाते नहीं करते। मुझे दूरी का अंदाज़ा जुगनुओं से हो जाता है। धुंध में बल्ब छोटे सूरज बन जाते हैं ख़ुद के आसमान में ख़ुद ही गुम। उनको देखने से कुछ हासिल नहीं होता। मैं डार्क शेड से बाहर आता हूँ कम अंधेरे की ओर चलता हूँ।

पिछली गली से गोली की आवाज़ आई पर ख़ाली गोली के क्या मायने? चीख़ भी तो साथ सफ़र तय करे। पिछले कुछ महीनों में कितनी चीखें एक दूसरे को काटती हुई कोहरे की सिलवटों में खो गयी। उन्होंने किसी से पता न पूछा अपना सफ़र ख़ुद तय कर लिया। हेनन मुझ से दूर क्यों जाना चाहती है क्या उसे मेरी बात पर भरोसा नहीं। जब मैंने कहा कि मैंने उसकी गुड़िया का सिर नहीं तोड़ा तो उसे मेरी बात माननी चाहिये न! पर मुझे मज़ा बहुत आता है उसकी गुड़िया को सोरो के मुँह में देने में वो अपने दाँत गड़ा कर उसे अपनी लार से गीला कर मुझे वापस कर देता है।

रेडियो पर कोई अनाउंसमेंट हो रहा है कह रहे हैं कि अपनी हिफाज़त ख़ुद करें। मैं तो मेहफ़ूज़ ही हूँ देख लो मेरे अंदर ख़ून है गीला लपलपाता गाड़ा ख़ून। जब ख़ून सूख जाता है तो नेलपॉलिश जैसा दिखता है। ऐसा लगता है हेनन लौट रही है रेडियो पर फिर अनाउंसमेंट हो रहा है अब कह रहे है हमला हो सकता है, दहशत फैल सकती है, बत्तियाँ बंद रखे, अपनी हिफ़ाज़त ख़ुद करें। कुछ-कुछ देर में साइरन शोर मचाते हैं। दूर-दूर तक अँधेरा फैल जाता है। सिर के उपर से हवाई जहाज़ शोर करते हुए गुज़र जाते हैं। तभी बड़े-बड़े बम गिरते हैं जो धमाके के साथ फटते है और बहुत सारे लोग खामोश हो जाते हैं।

मुझे नींद आ रही है पर ये हेनन अब तक क्यों नहीं आयी। गली में सिर्फ़ हमारे घर के बाग़ में बोगनवेलिया लगा हुआ है। हेनन उसके फूलों के नाम अपनी सहेलियों के नाम पर रखती जाती है। वो रोज़ ऐसा करती है। रुको ज़रा जूतों की आवाज़ें आ रही है। मैं और हेनन इस आवाज़ से डरते है। ये आवाज़ मार्च पास्ट करती पास आती जा रही है। पिछले महीने भी ऐसी ही आवाज़ आयी थी उसके बाद पतंगें उड़नी बंद हो गयी थी। हमारी और आस-पास की गली में तब से ही धुंध छाई हुई है। मैं सिकुड़ता जाता हूँ आवाज़ बड़ी होती जाती है। धुंध में कुछ छायाएँ दिख रही है। चार छायाओं ने एक लंगड़ी छाया को पकड़ा हुआ है। वो लंगड़ी छाया हेनन की है मैं और सिकुड़ जाता हूँ। हेनन ज़ोर से आवाज़ लगाती है मैं नहीं सुनता। चार में से दो छाया मुझे धुंध काटते हुए घर को आती दिखती हैं। मैं दीवार से लग जाता हूँ पाँव को पेट में सिकोड़ लेता हूँ सिर को घुटनों में दबा लेता हूँ।

खड़कखड़क करते दो जोड़ी पैर ज़मीन पर गिरे बोगनवेलिया को कुचल कर घर की देहलीज़ तक आते हैं। इतने में हेनन फिर ज़ोर से चीखती है और उनके हाथ से फिसल कर धुंध में गुम होने की कोशिश करती है। लंगड़ी छाया कितना भाग सकती है। तगड़ी छाया उसे फिर दबोच लेती है सोरो ज़ोर से भौंकता है और बोगनवेलिया की आड़ से निकल कर उन छायाओं पर झपटता है। एक छाया के हाथ से लोहा गिरता है दूजे के हाथ चलते हैं और सोरो की पसलियों के कुछ आर-पार हो जाता है। एक अजीब चीख जो मैंने पहले कभी नहीं सुनी धुंध को काट कर गली में कहीं खो जाती है। लिसलिसा ख़ून बोगनवेलिया के गिरे हुए सफ़ेद फूलों को मटमैला कर देता है। वो क़दम अब मेरी ओर बढ़ रहे हैं वो ठीक मेरे सामने खड़े है। उनमें से एक सिगरेट निकाल कर जलाता है दूसरा पूरे घर में तीखी गंध सा कुछ छिड़क देता है। दोनों हँसते हुए एक सिगरेट को बारीबारी पीते हुए धुंध में अपने धुंए को शुमार कर बाहर निकल जाते हैं। कुछ ही क्षण बाद मैं अपने आपको जलता हुआ देखता हूँ और हेनन को बेतहाशा चींखते हुए।

वो लोग हेनन से खेल रहे हैं जैसे सोरो गुड़िया से खेला था। हेनन का फ्रॉक ज़मीन चूम रहा है और वो उसे घसीट रहे हैं। मैं अपनी जगह से उठ कर हेनन के पास आ गया हूँ। आगे एक आर्मी जीप खड़ी है उस पर सितारा बना हुआ है। हमारे गाँव में बहुत समय से इस सितारे वाले लोगों के ख़िलाफ़ प्रचार चल रहा था। मैंने भी नारे लगाये थे जैसे मेरे माँ बाप ने लगाये थे। सब लोग चले गये नारे रह गये। कुछ दिन पहले ख़बर आयी थी कि सितारे वाले लोग मेरे बाप जैसे मिलते जुलते शख़्स को हर गाँव में ढूंढ रहे हैं। ये ख़बर मेरे घर तक भी आयी थी। उस दिन के बाद से हमने उसे घर पर देखा नहीं। फिर हेनन और मैंने माँ को भी खेत से लौटते हुए नहीं देखा। फिर हमने गाँव में कल शाम से किसी को भी घर लौटते नहीं देखा।

वो लोग हेनन को ले जा रहे हैं। मैं खड़ा देख रहा हूँ हेनन मेरी ओर नहीं घर की ओर देख रही है। जीप धुंध में गुम हो चुकी है। मेरे क़दम फिर घर की और बढ़ रहे हैं। बहुत दिनों बाद गली में रोशनी हुई है। हमारे घर से जुड़े दूसरे घर को रोशन करती हुई वो गली के तमाम घरों को लपटों के हवाले कर रही हैं। आज कितने दिनों बाद रोशनी नसीब हुई है। सोरो जलने के बाद और भयानक लग रहा है, मेरे पाँव जलने से रह गये हैं शायद उन पर वो पेट्रोल छिड़कना भूल गये होंगे। अब आग़ धीमे-धीमे हेनन की गुड़िया की ओर बढ़ रही है। धुंध फिर छाने लगी है।
❖❖❖  

No votes yet.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply