मर्यादा

मर्यादा

मर्यादा मे रहो, बंधन मे रहो,
स्वभाव से नम्र रहो, संयम मे रहो,
घुंघट मे छुपी रहो,
लज्जा से भरपुर रहो,
नजर झुकाकर रहो,
हर दर्द को हंसकर सहो।
जहर पीकर मीठा बोलो,
ज्यादा मुंह ना खोलो,
हर जुर्म अत्याचार झेलो,
शर्म हया की घुट्टी रोज पी लो।
रहो पति की मोहताज,
ना भाये किसी को तेरे सर का ताज,
कभी तेरे हिस्से मे आये मौत
तो कभी तेरे चेहरे पर तेजाब।।
पर अब तु संभल,
अब बन जा सबल,
तु नारी से नारायणी बन,
हर ले स्वयं का दुर्बल।।
हां मै मर्यादा मे रहती हुं,
पर तेरी मर्यादा पर क्या कहुं,
सोच बदल लो पापियों अब पाप मै ना सहुं,
अब मै कभी मौन ना रहुं,
हां मै मर्यादा मे रहती हुं।। रश..।।
❖❖❖

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu