हमारी तरह

हमारी तरह

उनका हुआ महफिल में आगाज़
बदलने लगे हर चेहरे के अन्दाज़
हर पल इन बदलते रंगों के पीछे
जैसे छिपा हो राज़ हमारी तरह

नैनों ने नैनों से बातें की
खामोशी ने तमाम शिकायतें की
यादों ने यादों से मुलाक़ाते की
बेखुदी ने तमाम शरारतें की
पर लब चुप रहे हमारी तरह

फिर से वही शाम वही मंज़र
फिर से वही दर्द वही असर
नैनों से गिरते मोती निर्झर
फिर से सन्नाटे में खोया शहर
सुबह के इंतज़ार में हमारी तरह ❖❖❖

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