नववर्ष सदा मंगलमय हो

नववर्ष सदा मंगलमय हो

नववर्ष सदा मंगलमय हो,
अमंगल का अवशेष नहीं;
मानव-मानव सब एक सम,
रहे भेद-भाव कुछ शेष नहीं।
दुर्भाव-अभाव गिले-शिकवे,
हों भस्म प्रेम की ज्वाला में;
मन निर्मल औ पुलकित हो,
कुंदन बन जाए उजाला में।
मात-पिता गुरु बाल-वृद्ध,
भाई-बहनों का प्यार भरा;
नित नयी सफलताएँ पाएँ,
पग-पग पर हो संस्कार हरा।
हम धरती माँ की संतानें,
सब एक स्वर में बोल उठें;
हम एक हैं बस एक सभी,
हममें मानवता जाग उठे।
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