प्रदूषण

प्रदूषण

दिल्ली हुई काली, क्या अब देश की बारी!!!
देश की राजधानी दिल्ली की आबोहवा में ज़हर घुल गया है, दिल्ली गैस चैम्बर बन चुकी है। ऐसी सुर्खियां हर सर्दियों के मौसम में समाचार पत्र एवँ टेलीविजन पर आपको देखने व सुनने को मिलती ही रहती होंगी, लेकिन यह प्रदूषण कितना ख़तरनाक और भयावह होते हैं इस पर भी आपको ज़रा गौर करना चाहिए ये सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि जीव-जंतु, पेड़-पौधे-पशु-पक्षियों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। यह सबसे तेज़ बच्चों और बूढ़ों को अपना शिकार बनाता है जिससे उन्हें साँस लेने में दिक्कत, सीने में जलन, आँखों में आँसू जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रदूषण भी कई तरह के होते हैं जिनमें वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण प्रमुख हैं। यह एक गंभीर समस्या है जो कि भविष्य में और भयानक होती चली जाएंगी इसलिए वक्त रहते इसके बचाव के लिए हर मनुष्य को अपनी ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए अन्यथा ये समस्या दिल्ली से निकल कर देश के अन्य हिस्सों में भी अपना असर तेज़ी के साथ दिखाना शुरू कर देंगी।

क्या है प्रदूषण- प्रदूषण एक प्रकार का धीमा ज़हर है जो हवा, पानी, और धूल के माध्यम से अपना असर दिखाता है जिससे ना सिर्फ मनुष्य बल्कि जानवर और पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचता है। सर्दियों के मौसम में धरती के ऊपर का तापमान कम हो जाता है हवा का प्रभाव भी धीमा पड़ जाता है इसके कारण वायु में जितने भी हवाएँ और गैसेस होती हैं वह नीचे ही रह जाती हैं ऊपर नहीं जा पाती हैं जिसके कारण प्रदूषण बढ़ जाता है।

क्यों होता है प्रदूषण?- प्रदूषण होने के कई कारण हैं जिनमें वाहनों की बढ़ती संख्या, औद्योगिक संस्थानों से निकलने वाले धुएं, लकड़ी के जलाने, धुम्रपान, उपलों व परालियों को जलाने से प्रदूषण अधिक तेज़ी के साथ फैलता है। लकड़ी, उपली व कोयले जला कर खाना बनाने पर वहाँ उठा धुँआ बाहर के प्रदूषण से ज़्यादा खतरनाक होता है।

प्रदूषण से होने वाली बीमारियाँ- वायू प्रदूषण से चर्म रोग, नेत्र रोग, स्वाईन फ्लू, रक्तचाप, शूगर, एंसिफिलायटिस, स्नोलिया, दमा, हैजा, मलेरिया जैसी बड़ी बीमारियां पैदा होती हैं, इसके अलावा गले में खराश, खांसी, नाक में इरिटेशन की समस्याएं भी प्रदूषण के कारण होती हैं। प्रदूषण बढ़ने से हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी ख़तरनाक गैसें मनुष्य के लिए बेहद नुकसानदेह होती हैं जिससे दिल के दौरे पड़ने की भी संभावना रहती हैं।
गर्भवती महिलाओं को बढ़ते प्रदूषण में ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए प्रदूषण बेहद गंभीर

होता है जिससे जन्म से पहले गर्भ में ही शिशु की मौत हो जाती है।
प्रदूषण का असर- एक रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के चलते देश में हर साल करीब 12 लाख लोगों को आकस्मिक मौत का सामना करना पड़ता है।

प्रदूषण से बचाव- बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार हमेशा कदम उठाती आयी है लेकिन इसके बचाव के लिए हर नागरिक को अपनी ज़िम्मेदारी समझकर अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, आबादी वाले क्षेत्रों को हवादार एवं खुला रखना चाहिए एवँ कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए, कोयलों एवं परालियों को नहीं जलाना चाहिए, हवा में पानी का छिड़काव नियमित रूप से करना चाहिए। इससे स्थिति में सुधार होगा। ❖❖❖

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