इश्क में

इश्क में

बहका दिया हमको और हम बहकते चले गये।
ज़रा सी बात पर एक-दूसरे से लड़ते चले गये।

पता था मुश्किल है डगर इश्क की
फिर भी हाथों में लेकर हाथ बढ़ते चले गये।

कांटें ही कांटें थे सफर में दूर थी मंजिल
जला कर प्यार का दीया हम अंधेरे मिटाते चले गए

जब से समाई हो मेरी आंखों में तुम
हम अश्कों को अपनी पलकों में छुपाते चले गये

जानते हैं कोई नही है तेरा अपना जहां में
हम ही कभी दोस्ती कभी दुश्मनी निभाते चले गये

एक दूजे के लिए ही बने हैं हम दोनों
गैरों की खुशी के लिए खुद को मिटाते चले गए।
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