रश्मियां

रश्मियां

अरुणोदय की रश्मियां जब वसुधरा पर आती है
सुनहरी सी आभा वसुधरा भी पाती है

लहलाहलाते है तरु,खेत खलियान
पंछियों की कलरव प्रकृति का गुणगान गाती है।।
फैला उजाला रवि के आगमन से
प्रकृति हुई प्रफुल्लित,प्राण वायु फैली चारों और
सूरज की किरणों से सुरभित हुआ जग में उजियारा
नयनों के दर्पण में सुख का करता सवेरा।।
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