नया सवेरा होने को है

नया सवेरा होने को है

नया सवेरा होने को है
मत घबराना इन काली रातों से
चांद को भी निगल लिया है जिसने
अब रहा नही कुछ खोने को है
डरना नही है फिर भी
लेके हिम्मत चलना होगा
बढ़ना होगा अन्धेरों में भी
क्योंकि,
एक नया सवेरा होने को है।
तूफानों से लड़ना सीख ले
भाग्य भरोशे नही रहना है
चल दे उन राहों पर अकेला
जहां भीड़ को भी कुछ संकोच है
संकुचित मन पर जमी मैल
पूरी तरह अब धोने को है
मत घबराना इन काली रातों से
क्योंकि,
एक नया सवेरा होने को है।
क्या हुआ जब एक अकेला
चल पड़ा मंजिल को छूने
मत बैठो तुम भी दर्शक बनकर
फौलादी रहे हैं कभी तुम्हारे भी सिने
वो देखो उस चौराहे पर
कुछ और मशालें जलने को हैं
मत घबराना इन काली रातों से
क्योंकि,
एक नया सवेरा होने को है।
❖❖❖

No votes yet.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply