नववर्ष के आगमन पे

नववर्ष के आगमन पे

समय का पहिया
365 दिन घूमकर
फिर नववर्ष की
पहली तारीख पर आकर
टिक जाता है
एक बार फिर
भरपूर उमंग के साथ
पूरी गति से
वही भूली बिसरी यादों को
उसी पुराने गीत को
नये शब्दों में ढालकर
नये सुरों में पिरोकर
नया रूप प्रदान करके
कानों में नये संगीत की गुंजन सा
होठों से नववर्ष का नया गीत
गुनगुनाता मन
महसूस होता है
यौवन की कगार पे
अभी भी नृत्य कर रहा
मयूरों सा
कूक रहा कोयलों सा
फूलों पे मंडरा रहा
भंवरों सा
कुलांचे भर रहा मृग की
उड़ानों सा
तलाश रहा नई मंजिलों को
नई सुबहों को
नयी रातों को
नये ख्वाबों को
हाथ में थामे-थामे
न जाने कब से
एक पोटली रंगों की
मैली हो चली
पर उम्मीद की
दिल की धड़कनों पे
लहलहाती किरण
अभी समय के साथ बूढ़ी नहीं
हुई

सूखी सी कूची में
आस्थाओं का रंग
कुछ सूखा
कुछ गीला
कुछ लाल, नीला, हरा,
पीला
रंग बेहिसाब
बस
ऐ आसमान
जरा इस नववर्ष के आगमन पे
मेहर की बारिश तो बरसाना
तेरी ही बारिश के पानी से
तुझे ही रंगना है
तेरी ही प्यास मिटानी है
तू तरता है
तो यह सूखी धरती भी
तरति है
एक बिंदु से दूसरे बिंदु
बंधते हैं
तो रिश्तों के तार जुड़ते हैं
संगीत की सरगम के द्वार
सजते हैं
जमीन से आसमान के
संसार खुलते हैं
नववर्ष में
हर रोज एक उम्मीद को
गले लगाना है
हर पल जुटना है
झोंकना है खुद को
पूरे करने को अपने ख्वाब
समय का चक्र 365 दिन
चलकर
जब पहुंचे अगले नववर्ष के
पहले दिन पर
तो पलटकर देखने पर
दिल शाबाशी दे खुद को कि
अरे वाह!
कोशिश करने वालों की
जीत तो हमेशा तय होती है

बस जरूरत होती है तो
एक कदम सही दिशा में
उठाने की
मंजिल खुद ही आकर
विजेता के कदम चूमती है
और उसे सपनों का सूरज
उगता है जहां हरदम
वो जगह दिखाती है
उससे जोड़ती हर राह से
मिलवाती है। ❖❖❖

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