नया वर्ष

नया वर्ष

नया साल फिर एक नया संघर्ष
इस बार ये न जाने क्या ले कर आएगा।

खुशियाँ बेहिसाब या दर्द आपार देगा
या संतुलित सा जीवन हमे उपहार देगा।

जो भी देगा जितना भी देगा
सहन करने की शक्ति भी बेहिसाब देगा।

एक नए अनुभव एक नया तज़ुर्बा दिलाएगा
फूलों से उठ कर पत्थर पर चलना सिखाएगा।

पल पल दिल में खौफ जगएगा
या डर की तहलीज़ से बाहर निकाल लायेगा।

हमारी उम्मीदों को फिर तोड़ जाएगा
या जो छोड़ गए हमें उनसे मिलवायेगा।

जो भी होगा जैसा भी होगा
हौसले के साथ हमें चलना हीं होगा।

भूल जाना होगा हमे पुरानी बातें
नई जिंदगी को गले लगाना हीं होगा।

खुशी होगी तो गम भी होगा
हर ज़ख़्म पर ज़िन्दगी का मरहम होगा।

कोई हमारा मज़ाक भी उड़ाएगा
कोई गले लगा कर हमे सम्भाल भी जाएगा।

कोई रौंध जाएगा हमारी भावनाओं को
तो कोई प्यार का चुनर ओढ़ायेगा।

नई चुनौती नया और नया जज्बा
फिर एक बार हमे दीवाना कर जाएगा।

नया साल ये जैसा भी होगा
साहस हर पल हमे करना हीं होगा।
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