एक मोड़

एक मोड़

रोना भी चाहें तो वो रोने भी नहीं देता
वो शख़्स तो पलकें भी भिगोने नहीं देता

वो रोज़ रूलाता है हमें ख्वाबों में आ कर
सोना भी जो चाहें तो वो सोने नहीं देता

ये किस के इशारे पे उमड़ आए हैं बादल
है कौन जो बारिश कभी होने नहीं देता

आता है ख्यालों में मेरे कौन ये अक्सर
जो मुझ को किसी और का होने नहीं देता

इस डर से कहीं तोड़कर आंसू ना बहायें
बच्चों को मैं मिट्टी के खिलौने नहीं देता

एक शख़्स है ऐसा मेरी बस्ती में अभी तक
जो बोझ अकेले मुझे ढोने नहीं नहीं देता ❖❖❖

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