नव वर्ष का विहान

नव वर्ष का विहान

सूर्य नभ से लेकर आए,
नया एक स्वर्णिम विहान।
नई उमंगो ने भरी उड़ान।
लौटी कलियों की मुस्कान।

लगता सब कुछ नूतन सा।
नेह का मेघ हर उर में बरसा।
मृत आशाएं हुई जवान।
प्रस्तर से भी निकला गान।

गोरैयों ने जब ची ची गाया।
सूने नीड़ में जीवन आया।
बागों में नव कोपल आए।
काक पिक संग संग गाए।

नव अंकुर कुसुमित है मन में।
पुष्प सुशोभित नव उपवन में।
सुरभि आई फिर जीवन में।
लौटी हरियाली निर्जन वन में।

खिला खिला मन का उद्यान।
संगीतकार ने जब छेड़ी तान।
कवि हृदय से फूटा नव गान।
मरू थल में लौट आईं जान।

हर्षित बहुत आज देश जहान।
जन जन का होवे कल्याण।
सभी सुखी हों एक समान।
आया नव वर्ष का नया विहान।

बाल, वृद्ध, युवा सब गाए।
नव वर्ष की छटा मन को भाए।
गढ़े हृदय अभिनन्दन गान।
चतुर्दिक फैली भारत की शान।
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