बैकिंग के क्षेत्रों में महिलाओं का बढ़ते कदम

बैकिंग के क्षेत्रों में महिलाओं का बढ़ते कदम

विश्वविख्यात अमेरिकी विचारक स्वेट मोर्डन द्वारा रचित पुस्तक Every Man a King में लिखा है कि- ’’यह संसार विजयी व्यक्ति का सम्मान करता है। लोग उसे ही पसंद करते है क्योंकि ऐसे ब्यक्ति के चेहरे से उत्साह, उल्लास और शौर्य झलकता रहता है। उसके सम्पर्क में आते ही जीवन में एक विचित्र सा उत्साह और उत्लास छा जाता है। उसे सिर आँखों पर बिठाने लगते है।’’
यही कारण है कि आज एकीसवी – शदी में भारत की बेटियाँ से जीवन का कोई क्षेत्र अछूता नहीं रहा है। जहाँ तक बैंकिंग सेवा की बात है आज 25 प्रतिशत महिलाएँ बैंकिग सेवा को पसंद करती है एवं योगदान दे रही है। इनका योगदान भारत के कुल राष्ट्रीय उत्पादकता में बीस प्रतिशत है। बैंकिग क्षेत्र में महिलाएँ का बढते कदम अहम रही है। अपने कुशल इरादे एवं धुन के पक्के होने के कारण इस क्षेत्र में नियमित कामयाबी हासिल कर रही है।

बैंक एक लोक-उपक्रम है जहाँ मौद्रिक विनियम प्रणाली के तहत रूपये का लेन-देन होता है। आज संसार का सभी वाणिज्य-व्यापार, आयात-निर्यात, अन्तरराष्ट्रीय व्यापार, वेतन, मजदूरी का भुगतान तथा वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-बिक्रय बैंकों के द्वारा ही होता है। बहुत ही महत्वपूर्ण कागजात एवं बेश कीमती वस्तुएँ आज बैंक भी रखने का प्रचलन है। आज के प्रगतिशील एवं विकासशील दुनिया में बैंकों का महत्व काफी बढ सा गया है। बहुत ही अनुशासित, स्वच्छ एव संरक्षित परिवेश में बैंकों के कार्य प्रणाली का निर्धारण एवं निष्पादन किया जाता है। यही कारण है कि बैंकिग क्षैत्र में अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा महिलाओं का कदम बढा है। बैंक महिलाएँ के कार्य करने का एक सुन्दर संस्थान जहाँ उन्हें अपने कार्य अभिक्ति की आजादी एवं खुशनुमा महौल में कार्य करने का अवसर प्रदान होता है।

यह सच है कि आज बैकिंग क्षेत्र कमप्यूटर एवं नेट वर्क्क से जूड़ जाने के कारण इसका कार्य सुलभ एवं आसान हो गया है। दिन भर का कार्य कुछ घंटे में पुरा हो जाता है। बैंकिग क्षेत्र में महिलाओं का बढते कदम का यह भी कारण है कि बैंक अपने कर्मियों के चर्तुदिक विकास के लिए सतत् जागरूक एवं दृढसंकल्पित है। अपने कर्मियों के हरके सुख सुविधाओं को पूरा करने हेतु बैंक उचित ब्याज दर पर वितीय सहायता प्रदान करती है। यही कारण

है कि बैकिंग क्षेत्र के कर्मियों का रहन-सहन सरकार के अन्य विभागओं के कर्मियों से बिलकुल भिन्न रहता है। चेहरे पर एक
अजब सा खुबसूरती लिए दिल को मोह लेता है। यही कारण है
कि बैंकिग क्षेत्रों में सेवा करना महिलाओं की पहली प्रथमिकता रही है। निःसन्देह बैंकिग क्षेत्र में महिलाएँ के आने से लोगों के बीच एक आत्मविश्वास बढा है। इसका मुख्य कारण है कि महिलाओं का जबावदेही के साथ निर्धारित समय सीमा के अंदर कार्य निष्पादन करना। बस्तुतः उनके अंदर एक दया एवं अपनापन का भाव निहित रहता है।

आज प्रायः सरकारी बैकिंग क्षेत्र एवं निजी बैंकिंग क्षेत्र में महिलाएँ का योगदान अधिक है। ये बैंकिग का किसी भी कार्य को सुन्दर-ढंग से करने की दक्षता रखती है। इसके लिए उन्हें बैंकिग संस्थान से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को करना पड़ता है। बैंकिग क्षेत्र की महिलाएँ बडी ही gentle, generous, एवं genious होती है। ये बडें साहसी एवं निर्मीक भी होते है। साहस के बदोलत नारी आदर्श बन जाती है। चन्दा कोचर, इन्दिरा नूई, एवं अन्यन्य महिलायें बैंकिग क्षेत्र के मोडल कहे जाते है एवं महिलाएँ के प्रेरणा श्रोत है।

बैकिंग क्षेत्र के महिलाऐं से पहली वार मिलते एवं देखते ही तत्काल यह पता चल जाता है कि उसकी कार्यशक्ति कितनी प्रबल कोटी का है या दुर्बल कोटी का। दूसरे शब्दों में इसे सकारात्मक या नकारात्मक भी कहल सकते है। उनके बोलने बैठने कार्य करने हँसने एवं रहन सहन का ढंग की निराला एवं अदभुत होती है जो किसी के भी मन एवं आत्मा को स्पर्ष करती है एवं आम लेग इससे लाभान्वित होते है।
महिलाओं को अपनी कर्मठता पर पुरा भरोसा एवं आत्म-विश्वास होता है। चाहे लोग उनके विश्वास को मूर्खता का प्रलाप ही क्यों न समझे पर वे अपनी लगन के इतने पक्के होते है कि उन्हें किसी के कहने न कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

वे अपने कार्य में जुटे रहते है और सफल होकर ही दिखाते है। उनका आत्मविश्वास उन्हें किंचित भी विचलित नहीं होने देता है। यदि मन में दृढ़ विश्वास है इच्छा है तो कोई बडी बात नहीं कि महिलाएँ अपने प्रयत्नों से किसी बडी बैकिंग कम्पनी के मालिक बनकर ऐशो आराम की जिन्दगी जी सकते है। आज महिलाएँ निर्बलता एवं लिखो फेका का प्रर्याय नहीं है बल्कि समाजिक एवं राष्ट्रीय विकास घारा की एक कड़ी है।

आज सरकारी सेवा में बढते महिलाएँ की सहभागिता को देखते हुए सरकार के स्तर से भी महिलाओं को संरक्षण एवं सुरक्षा प्रदान की गयी है कार्यस्थल पर इनके साथ कोई ज्यादती नहीं हो इसके लिए विशेष कानून बनाये गये है। राष्ट्रीय महिला मानवाधिकार आयोग एवं प्रान्तीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया है। जिला स्तर पर महिला पुलिस हेल्फ लाईन का गठन महिलाओं के सुरक्षा को लेकर किया गया है। बैकिंग क्षेत्र में भी महिलाएँ के लिए विशेष प्रबंध किये गए है। जिससे महिलाएँ अपने जीवन में महफूज अनुभव करती है। फलतः उनके जीवन में एक आशा का संचार उत्पन्न होती है।

Shakespeare ने भी लिखा है कि ’’The word react upon the hope” अर्थात यह संसार आशा पर आधारित है। वस्तुत: जिस दिन मनुष्य के मन से आशा समाप्त हो जायेंगी उस दिन मानव समाप्त हो जायेगा। आशा और मनुष्य, मछली एवं पानी के तरह है। मछली के लिए पानी आशा है। पानी से अलग होते ही मछली अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेती है। महिलाएँ में भी अपने जीवन जीने की ललक की आशा प्रबल मात्रा में पाई जाती है। आशा का जन्म इच्छा से होता है। जब तक इच्छा अथवा महत्वकाक्षा नहीं होगी तब तक कर्म की प्रेरणा नहीं मिलेंगी और जब कर्म करने की इच्छा नहीं होगी तो आशा का संचार भी कहाँ से होगी? अथवा अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचानकर ही महिलाएँ अपने व्यक्तित्व का विकास करती है। इसमें जरा भी संदेह नहीं कि पूरे सृष्टि को महिलाऐं अपने आँचल में सहेज रखी है। जिसका शतप्रतिशत लाभ बैंकिग क्षेत्रों को हो रहा है। निःसन्देह ये पुरुषो से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। यह सच है कि इसका प्रतिशत कम है परन्तु आज से 10 वर्ष पहले की अपेक्षा अधिक है। इसका प्रमुख कारण है कि कुछ महिलाओं में एकाग्रता आत्मविश्वास, मनोबल की भारी शक्ति छिपी हुई है एकाग्र मन से आप आशा एवं आकांक्षा को जितनी तीव्रगति से अपने हृदय में जागृत करते है वह उतनी ही तीव्रगति से आपकी ओर खीची चली आती है।

कुछ महिलाएँ जो बैंकिग सेक्टर में कार्यरत है इसका एक कारण उनकी स्वप्नदृष्टा और कल्पनाशीलता भी है जिसके बदौलत वह इस क्षेत्र में उड़ान भरती है एवं लक्ष्य को प्राप्त कर लेती है। जो महिलाएँ अपनी इच्छाओं को वास्तविक स्वरूप देने के लिए अथक परिश्रम करती है वह निश्चित रूप से अपने सपनों को पूरा कर सकती है। यही कारण है कि आज इस प्रगतिशील दुनियाँ में महिलाएँ का योगदान सरकार के विभिन्न क्षेत्रों के अलावे बैंकिग सेन्टर में अधिक है। महिलाएँ के बैकिंग क्षेत्र में आने से बैंकिग के कार्य प्रणाली में सुधार हुआ है एवं बैंक प्रगति के पथ पर सतत अग्रसर है। जो महिलाएँ अपनी सहायता स्वय नहीं करती अपनी आशाओं को जाग्रत नहीं रखती अपने उल्लास को नहीं बनाये रखती अपने प्रयास को सतत सजग नहीं बनाये रखती वह जीवन के किसी भी क्षेत्रों में सफलता हासिल नहीं कर सकती है। मेरा ऐसा प्रबल विश्वास है कि आये दिन महिलाएँ बैंकिग क्षेत्रों में कार्य करने हेतु आगे आये। अपने जीवन के सफल बनाते हुए बैंकिग क्षेत्र को भी सफल बनाये जो देश के आर्थिक विकास में सहायक एवं समृद्धिशाली भारत का निर्माण कर सके।
❖❖❖

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu