नववर्ष-एक नयी किरण

नववर्ष-एक नयी किरण

कुछ ख्वाब अधूरे है अब भी,
ख़्वाहिशे हैं दिल में दबी हुई।
हसरतें मुकम्मल हो सबकी,
नववर्ष की फिर दस्तक हुई।।

मंहगाई छोड़ गगन की राह,
इस बार धरातल पर उतरे।
अधूरी ना हो अब कोई चाह,
नील-गगन से खुशियां बरसे।।

धर्म मनुजता हो जग में,
भारत इक रंग में रंग जाये।
सत्ता-स्वार्थ के व्यापारी,
चिंगारी भेद की ना जला पाये।।

कली ना अब जाये मसली,
बगिया की रौनक बनी रहे।
रक्तरंजित ना हो ये ज़मीं,
सरहद पे अमन का फूल खिले।।

ना इश्क अधूरा हो कोई,
मनचाहा सभी को मीत मिले।
प्रेम का रंग बसंत सा बिखरे,
पीली सरसों चहुँओर खिले।।

नववर्ष सुखःद हो सबका,
होंठो पर निश्छल मुस्कान सजे।
खुशहाल रहे देश अपना,
मंगलमय-हर्षित हर इंसान रहे।।
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