हमने तो बस

हमने तो बस

हमने तो बस इतना जाना
जीवन क्या है खोना पाना

मैल नहीं है जिसके दिल में
अपना है उससे याराना

मस्त रहा करते है हम तो
बस्ती हो चाहे वीराना

पहले सीधे सच्चे थे सब
अब तो है हर शख़्स सयाना

कुछ तो होगा तेरे दिल में
प्यार नहीं है हमने माना

काश कभी आये वो पल भी
मेरा सर हो तेरा शाना

ख़ुद को बहलाने की ख़ातिर
उम्मीदें हैं एक बहाना

छोड़ यहीं पर अपना सब कुछ
सबको इक दिन है मर जाना

मत पूछो वर्दी वालों की
देख लिया हर चौकी थाना

नोट कमाती सारी दुनिया
अपनी ख़्वाहिश नाम कमाना

ग़ैर हुआ आज वही तो
जो था अपना यार पुराना

पागल तो तुम, सच लिखते हो
यारों ने मारा है ताना

अच्छा लगता है मुझको तो
बस माँ के हाथों का खाना

‘अहद’ तुम्हारी आदत है ये
ग़लती करना फिर पछताना!
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