मैंने देखा है भगवान को

मैंने देखा है भगवान को

मैंने देखा है
सरहद पर लड़ते
लाखों जिंदगियों को
बचाते हुए एक इंसान को।
हाँ, मैंने देखा है भगवान को।

रोली, चावल, पान,
कुमकुम, अगरबत्ती से
लोग करते हैं प्रसन्न
अपने भगवान को।
पर मैं लाना चाहता हूँ
शहीद की विधवा और
बूढ़े मां-बाप के उदास चेहरों पर
खुशियों भरी मुस्कान को।

नादान होकर लोग ढूँढ़ते हैं
मंदिर-मस्जिद में भगवान को।
मैं उसे देखता हूँ
खुले आसमान में
सीमाओं पर मुस्तैद
वर्दी पहने, बंदूक ताने
धारण किये हुए
अपनी अलग पहचान को।

कड़कड़ाती ठंड हो या भीषण गर्मी
या फिर हो मूसलाधार बरसात
विचल कभी वह होता नहीं
निजी ख्वाहिशों को दफ़न कर
जो तकलीफों के अग्निपथ पर चलता है
जिसका मन हर जंग में
हर बार मचलता है
वतन पर न्योछावर करने अपने प्राण को।

हाँ, मैंने देखा है
माटी की मोहब्बत में
मीरा की तरह पागल परवान को
हाँ, मैंने देखा है भगवान को।
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