छोटी लड़की से छोटी बहन तक का सफर

छोटी लड़की से छोटी बहन तक का सफर

7 जनवरी 2019 को डायट के स्वामी विवेकानंद हॉल में मंडल के माध्यमिक स्तर पर तैनात संविदा स्पेशल शिक्षकों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम था। ट्रेनिंग थोड़ा विलंब से शुरू हुआ ऐसे में हम सभी प्रशिक्षणार्थी बाहर फील्ड में खड़े थे और हम सभी बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाउंड्री को देख रहे थे जो कभी काफी गंदी पुरानी दिखती थी उसे भिन्न-भिन्न कलाकृतियों से रंगा गया था लेकिन उसके जो पावे (पिलर) थे, वे सादा दिख रहे थे। ऐसे में एक छोटी सी लड़की आती है। वह अपने हाथों में रंग लगा कर के दो पाओं (पिलर) पर अपने हाथ में रंग लगाकर उस पाओ (पिलर) पर हाथ का छाप लगाकर रंगीन बना देती है।
मैं अवलोकन करने वाला ऐसा देखकर थोड़ा अचंभित होकर सोचता हूं यह क्या कर रही है इसके दिमाग में क्या चल रहा है कि सभी लोग पेंट करके चले गए हैं और यह पावों (पिलर) को रंग रही है जो एक ही रंग के दिख रहे हैं। फिर 4 दिन का प्रशिक्षण समाप्त हुआ 10 तारीख को घर पहुंचा शाम को दैनिक जागरण का पेपर लिया उसमें देखा की वही फोटो छपा हुआ है और उसमें उस लड़की का नाम भी लिखा हुआ है।
पेपर में नाम तो मुझे मिल गया, फिर मैंने सोचा चलो उसे फेसबुक पर खोजता हूं जब उसे खोजना शुरू किया तो वह अखबार वाले नाम से दिखी मैंने उसे बहन लिखकर तत्काल अपना परिचय देते हुए मैसेंजर पर उसके मैसेज भी किया। लेकिन शायद उस समय बहन को फेसबुक वाले “भाई” पर विश्वास नहीं था। इसलिए उसने जबाब तक नहीं दिया। मैं भी साइबर क्राइम के बारे में थोड़ा बहुत जानता हूं इसलिए डर की वजह से बहन को फॉलो करना छोड़ दिया था।

लेकिन कुछ महीने बाद उस बहन से जुड़ने का मौका एक व्हाट्सएप ग्रुप में मिला लेकिन मुझे बहुत दिन तक यह पता नहीं था कि इस ग्रुप में वह छोटकी भी शामिल हैं। एक लोग ने मुझे शिक्षिका का नम्बर दिया और उसके के बारे में बताया। उस दिन पता चला यह तो शिक्षक हैं।

उसके बाद बहन का फेसबुक पर कविता लिखने वाला पोस्ट देखकर बहुत अच्छा लगा। उसे मैं अपने कंप्यूटर पर लिखता था। लिखने का मेरा उद्देश्य बस इतना था की मैं भी कुछ लिखना सीख जाऊंगा।

2019 में एक गुरु/छोटकी बहिनी के अवलोकन से मुझे मनोभाव

को लिखने की कला, किताब पढ़ने एवं सीखने के साथ-साथ एक बहुत अच्छी छोटी बहन के रुप में मिली। ❖❖❖

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