जनवरी है आई

जनवरी है आई

आई देखो, जनवरी है आई।
संग-संग देखो क्या है लाई।।
कहीं कँपकपी, कहीं सरसरी।
नाक भी बेचारी देखो बह रही।।
किसी को लग गयी है सर्दी।
बनी है देखो ये कैसी बेदर्दी।।
आई देखो जनवरी है आई।
आती इसके धूप है भागी।।
कहाँ छूप गयी वो परम अनुरागी।।
आई देखो है जनवरी आई।
होगी मस्ती, धूम-धड़ाका।
फूटे सर्दी, चाहे बन पड़ाका।।
आई देखो है जनवरी आई।
निकालो कंबल, ओढ़ो रजाई।।
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