प्रिय पापा

प्रिय पापा

सुनिए न पापा
मैं हूँ आपकी गुड़िया
मैं हूँ एक नन्ही परी मेरे पंख मुझे दे दीजिए,
उडकर आसामन छूने में सहयोग मेरा कीजिए ।

सुनिए न पापा,
मैं खूब पढना चाहती हूँ,
मैं कमजोर नहीं हूँ साबित करने का मौका मुझे भी दीजिए,
मैं भी भैया के जैसे बन सकती हूँ,
मुझे एक प्रयास तो करने दीजिए।।

सुनिए न पापा,
मैं बोझ नहीं आत्मनिर्भर बनना चाहती हूँ

सुनिए न पापा,
काम सब करके भी अपनी अस्मिता का ध्यान मैं रखूॅगी,
होगा न सर आपका नीचा मेरे किसी कार्य से,
मेरे ही कारण सर ऊचा होगा आपका अभिमान से।।

वादा कर रही हूँ आपसे
जीतूंगी जरूर, न भागूंगी कभी रण से

मेरी हर सफलता का श्रेय बस आपको ही मिलेगा,
पहचाने जाएंगे एक दिन आप मेरे नाम से।

सुनिए न पापा,
सुना है बडा सुन्दर जहाँ है ये
एक बार मुझको देखने दीजिये
माँ के कोख से बाहर आकर,
जीने का हक़ तो जरा दीजिये ।।
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