जनवरी

जनवरी

थोड़ा कपकपाएगी,
थोड़ा थरथराएगी,
दाँतों को किटकिटाएगी,
सांसों को सरसराएगी,
सर्दी लिये जब जनवरी आएगी।

थोड़ी देश भक्ति जागाएगी,
थोड़ी हिन्दी भी बुलवाएगी,
देश के शहीदों की याद दिलवाएगी और
पूरे देश को रुलाएगी,
देश भक्ति का जज़्बा लिये जब जनवरी आएगी।

कहीं नए साल का जश्न मनवाएगी,
तो कहीं बीते साल को रुलाएगी,
कहीं नए संकल्प दिलवाएगी
तो कहीं पुराने संकल्प पूरे ना हो पाने पर हसीं उड़वाएगी,
एक सकारात्मक ऊर्जा लिए जब जनवरी आएगी।

भाई चारा और प्रेम बढ़वाएगी,
गिला-शिकवा मिटवाएगी,
31 दिसम्बर की रात हर एक को गले लगवाएगी,
प्रेम, ऊर्जा, संकल्प और खुशी लिए जब जनवरी आएगी!!!
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