पहली बार

पहली बार

हां पहली बार था
वो कदम जब मैंने उठाया
उसको भूलने का
उसको छोड़ने का
उससे दूर जाने का
मैंने था बहाना बनाया
और कोई रास्ता न था
अब दिल का शायद वास्ता न था
मोहब्बत भी ख़त्म थी या
विश्वास का गला घोंटा गया था
वो शख्स अब अपना न लगता था
पहली बार वो बेगाना लगता था

हाँ पहली बार था
जब मैं खुद से लड़ा था
दिल फिर भी ज़िद पे अड़ा था
मैं सिर्फ तुझे भूलना चाहता था
शायद इसीलिए पीने लगा था
सारे लोग अब बेगाने लगते थे
वो न जाने क्यों मुझे दीवाना कहते थे
मैं उनकी बातों पे हँसता था
लेकिन अंदर ही अंदर कोई रोता था

हाँ पहली बार था
जब मैं इतना टूटा था
जिसने दिया था ताउम्र का वादा
उसी का हाथ अब छूटा था
उसकी बातें अब चुभती थी
उसकी यादें अब और बरसती थी
मेरी आँखों से निकले हर उस पानी मे
मेरी लिखे हर गीत और कहानी में
उसकी बाहों का झूला अब न मिलता था
अब मेरा मखमल का भी अब बिस्तर चुभता था
उसकी यादों में रातें अब आसानी से कट जाती थी
मेरी सूरत अब रोज़ मयख़ाने में दिख जाती थी
सच बताऊँ अब ये न मुझसे बर्दास्त होता है
पल पल ये जीवन अब नीरस लगता है
मैं मरने को कोशिस में और जी जाता हूँ
तुम्हें भूलने की कोशिस में अब और पी जाता हूँ
बस तुम नहीं अब सम्भालने को
ये भी तो पहली बार है
ये सारी बातें अब हो रही पहली बार हैं।
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