बेचैन आंखों

बेचैन आंखों

बूढ़ी बेचैन आंखों को सब्र नहीं आता
जब तक बेटा लौट कर घर नहीं आता
आशियाने को अपनों की नजर लगी होगी
गैर तो यहां कोई नजर नहीं आता
मासूम चिड़िया अपना घर बनाए कैसे
इस रास्ते पे अब कोई शजर नहीं आता
क्यों सारे शिजरे लड़कों के मोहताज हैं
क्या बेटी में बाप का असर नहीं आता
मैं अब उसकी गली में कम ही जाता हूं
वह भी आजकल इधर नहीं आता
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