फूले फसलों के गाल

फूले फसलों के गाल

सूर्यदेव उत्तरायण हो गये ||
बसंत गाये मल्हार ||
भरे भरे खेतो में देखो ||
फूले फसलों के गाल ||

पीली चूनर पहिन चुकी है ||
पियरा है पियरान ||
हर्षित हुये किसान है ||
कुचाने लगे है आम ||

रंग बसंती छा गया ||
देखो चारो ओर ||
वन जंगल में नाच रहे ||
मस्त मगन हो मोर ||

ऋतुओं को भाने लगी ||
सुन्दर शुद्ध बयार ||
चौकन्ने होने लगे है ||
जो शांत पड़े थे ताल ||

यौवन अपने रूप का ||
महक रहा लुटाय ||
बाबा बैठे पलंग पर ||
फाग रहे है गाय ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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