भ्रमर मचलाने लगे

भ्रमर मचलाने लगे

उड़ उड़ कर अम्बर से ॥
जब धरती पर आता है ॥

देख के कंचन बाग़ को ॥
अब भ्रमरा मुस्काता ॥

फूलो की सगन्धित ॥
कलियो पर जा के ॥
प्रेम का गीत सुनाता है ॥

अपने दिल की बात कहने में ॥
बिल्कुल नहीं लजाता है ॥
कभी कभी कलियो में छुप कर ॥
संग में रात बिताता है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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