अद्भत बालक : गूंगा आदमी

अद्भत बालक : गूंगा आदमी

हर दिन प्रातः उठ कर के वह॥
मेरे समीप आता है ॥
अपने नाजुम हाथो से वह ॥
मेरा पांव दबाता है॥
गूंगा बैठा कुछ न बोलू॥
वह अपनी बात बताता है॥
अमृत गंगा के जल से वह॥
रोज़ हमें नहलाता है॥
कितना अद्भुत बालक है वह॥
मेरी ही रट लगाता है॥
कभी कभी वह पूछ बैठता॥
क्या तुम कभी न बोलो गे॥
दादा कहते तुम भोले हो।
आज नहीं कल डोलो गे॥
अपने हाथो से सजा के थाली ॥
मुझको रोज खिलाता है ||
उस बालक की छाप निराली॥
जो हमें देखने आता है॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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