राष्ट्रहित

राष्ट्रहित

अजीब ये इत्तेफाक है
बहुतो को ये पता भी नही
बयान उनका देश हित में है
या देश के खिलाफ है
गजब की ये राजनीती है
गजब का ये सत्ता मोह है
जाने कैसे कैसे पढ़े लिखे
ये अल्पज्ञानी लोग है

इतना तो समझ होना चाहिये
राष्ट्रहित और राष्ट्र के खिलाफ
अंतर तो पता होना चाहिये
राष्ट्र से ही तुम्हारा वजूद है
राष्ट्र जितना मजबूत
फिर उतनी तुम्हारी भुजाएं मजबूत है
राष्ट्र ही माता राष्ट्र ही पिता है
इतना पढ़ लिखकर भी तुम्हे
क्या इतना भी नही पता है

मेरी कलम
इतनी भी कमजोर नही
जो गलत को गलत
और सही को सही कहने में हिचकिचाये
राष्ट्रहित ही राष्ट्रधर्म है
और राष्ट्रधर्म से बड़ा
कुछ भी नही है
राष्ट्रहित ही मेरी जिंदगी है
क्योकि राष्ट्र से ही मेरी पहचान होती है

लेखक धनराज खत्री

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dhanraj21

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