चम्पा का फूल

चम्पा का फूल

रूप रंग अव वास भरा है //
करती हो मदहोश //
आस-पास की धारा पे //
हरदम रहता जोश //
अवगुण ऐसा कौन है //
जो भ्रमर न आवत पास //
रूप रंग को देख कर क्या ?
भवरा जात लजात //
क्या संतापी आत्मा //
आ जाता है क्रोध //
आस-पास की धारा पे //
हरदम रहता जोश //
हंस कर चम्पा कहने लगी //
ऐसी नहीं है बात //
न संतापी आत्मा //
भवरा नहीं लजात //
राधा की वरनी मै बनी //
भ्रमर कृष्ण का दास //
अपनी जननी समझ के //
करता नहीं खरोच //
आस-पास की धारा पे //
हरदम रहता जोश //

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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