क्यूँ आ गये

क्यूँ आ गये

खिलती चमन में //
दाग लगाने को आ गये है //
उभरती हुयी आह मिटाने //
को आ गये है //
ललचा रहे है ऎसे //
जैसे साबूत निगल जायेगे //
या हम उन्हें खायेगे //
या वे मुझे खायेगे //
अपनी ख्वाहिशो को //
मिटाने को आ गये है //
देख रहे है ऎसे जैसे //
सदियो से जानते हो //
सातो जनम से केवल //
मुझको ही मानते हो //
खुश्बुओ से दामन को //
भिगाने को आ गये है//

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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