कवि की काल्पनिक सोच

कवि की काल्पनिक सोच

कविता कवि की सोच का //
अनमोल मोती है //
कवि की लेखनी ही //
कविता को पिरोती है //
कवि की क्या मिशाल दू //
जो रवि से ऊंचा है //
क्या कभी किसी ने //
कवि के दर्द को पूछा है //
कविता लिखने की क्षमता //
किसी किसी में होती है //
कवि की लेखनी ही //
कविता को पिरोती है /
कवि ही काल्पनिक बन //
कविता में समाता है //
अर्थो को समझ के //
शब्दो को भिड़ाता है //
कवि के लिखे सन्देश पढ़ //
अप्सराये भी रोती है //
कवि की लेखनी ही //
कविता को पिरोती है /

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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