मै क्या जबाब दू

मै क्या जबाब दू

तुम कहती जबाब दो ।।
मै क्या जबाब दू ॥
अभी दिल्लगी से मुझको ॥
पाला नहीं पड़ा ॥
खुला हुआ है बंगला ॥
बसा नहीं है कोई ॥
अभी किसी ने दिल में ॥
ताला नहीं जड़ा है ॥

कालिया बहुत हंसी थी ॥
मदहोश भी हुआ था ॥
आते ही होश पैदल ॥
वहाँ से आ गया था ॥
उलझा तुम्हारे हुस्न में ॥
चस्का तुम्हे लगा ||
तुम कहती जबाब दो ।।
मै क्या जबाब दू ॥
अभी दिल्लगी से मुझको ॥
पाला नहीं पड़ा ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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