अपना बना लो

अपना बना लो

एक बार अगर हां कह दो सनम ॥
मै खुशियो संग मोती लुटाऊगा ॥
प्रेम बाग़ में डाल के झूला ॥
बाहो में तुम्हे झुलाऊगा ॥

हंस हंस जीवन साथ जिऊगा ॥
अमृत कलश छलकाऊँगा ॥
अपना तुम्हे बनाऊगा मै ॥
गीत रसीला गाऊगा ॥
प्रेम बाग़ में डाल के झूला ॥
बाहो में तुम्हे झुलाऊगा ॥

तुम्हे देख कर फ़िदा हुआ मन ।।
चंचल आँखे मचलाती है ॥
राह तुम्हारी देख देख के ॥
देहिया यूं ही इठलाती है ॥
हमसफ़र बना लो जाने जा तुम ॥
सपनो को तेरे सजाऊगा ॥
प्रेम बाग़ में डाल के झूला ॥
बाहो में तुम्हे झुलाऊगा ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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