फिर उपवन में आयी तितली

फिर उपवन में आयी तितली

दूर देश से फिर तितलियां ॥
इस उपवन में आयी है ॥
रंग बिरंगे फूल देख कर ॥
चक्कर कई लगायी है ॥

कभी बैठती हरे पुष्पो पर ॥
फिर उसपे उड़ जाती है ॥
महक उड़ाती जब कलिया है ॥
देख उन्हें इठलाती है ॥
फूल रिझाते है उनको जब ||
वे उन्हें देख मुस्कायी है ||
रंग बिरंगे फूल देख कर ॥
चक्कर कई लगायी है ॥

भाव फूल देते जब उनको ॥
वे उड़ उड़ कर के गाती है ॥
चंचल चितवन उनकी होती ॥
अगल बगल मडराती है ||
सारे साज को बजा बजा के ||
वे खुद फूलो पर छायी है ||
रंग बिरंगे फूल देख कर ॥
चक्कर कई लगायी है ॥

बबलू डबलू उन्हें पकड़ने ॥
पीछे पीछे जाते है ॥
असफल हो कर मुह लटकाये ॥
वापस घर को आते है ॥
द्र्श्य देख आश्चर्य खूब होता ||
क्या उनकी चतुरायी है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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