ओ फ़िदा हो गया

ओ फ़िदा हो गया

देख हुस्न तत्काल ही ॥
युद्ध को ललकार दिया ॥
मुख से हंसी निकाल के ॥
आँख मुझको मार दिया ॥

मै असमंजस में पड़ी ॥
समझ न पायी बात को ॥
ओ इतना चालाक था ॥
भांप लिया था घात को ॥
उसने बिना गवाये मौका ॥
मुझपे बाण को तान दिया ॥
मुख से हंसी निकाल के ॥
आँख मुझको मार दिया ॥

मै हुयी समर्पित उसके खातिर ॥
उसने अरमान मिटाया ॥
मेरी कोमल सेज पर ओ ॥
जमकर ऊधम मचाया ॥
अचरज मुझको होने लगा ॥
जब उसने संधान किया ॥
मुख से हंसी निकाल के ॥
आँख मुझको मार दिया ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

No votes yet.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

Leave a Reply

Close Menu