पूर्ण आसक्ति

पूर्ण आसक्ति

मैं करूं
शिव की भक्ति
शिव आराधना करें
न जाने किसकी
मैं शिव के दर्शन के लिए
जाऊं शिव मंदिर
वो न मालूम
शरण जायें किसकी
मैं चरणों में अर्पित करूं उनकी
अपना सर्वस्व
वो न्यौछावर करें
अपना प्रेम और आशीर्वाद
बंद नेत्रों, बंधे हाथों से
न जाने झोली में किसकी
शिव के ललाट पे
त्रिपुंड तिलक सजा है
त्रिनेत्र खुले नहीं
द्वार भीतर से बंद हैं
मन मंदिर के कपाट अभी खुले नहीं
बिना बोले सब जाने
दुनिया के कण कण में
व्याप्त ख्याति उनकी
सम्पूर्ण दुनिया की
हर एक गतिविधि को
संचालित करें
हर किसी की रक्षा करें
प्रभु शिव भोले भंडारी
उनकी शक्ति
उनकी भक्ति में
मुझे पूर्ण आसक्ति।

मीनल

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