समय का कैक्टस

समय का कैक्टस

जीवन चल रहा है
पर वक्त ठहर गया है
ठीक एक बरसों से बंद पड़ी
घड़ी की सुइयों की तरह
अपने घर के आंगन के
किसी कोने में
न जाने कब से बेकार पड़े
एक टूटे फूटे गमले में
मैंने बोये थे
बीज फूलों के पौधे के
यह अब फूटा तो
नाग की तरह
फन फैलाये
कैक्टस बनकर उग गया
तन गया मेरी छाती पे
एक सींग मारती मरखनी गाय की
तरह
न दूध दे
न दुलार दे
बस चारा खाती किसी
जंगल में दर दर भटकती
चरवाहे से बिछड़ी
आवारा गाय की तरह
न फूल दे
न फल दे
यह समय का कैक्टस भी
कांटें चुभाये हरदम
एक अलमारी में बंद पड़ी
रुकी हुई
मरम्मत से भी जो न हो सके
ठीक
एक बेकार घड़ियाल सी
घड़ी की तरह।

मीनल

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