अंतिम क्षण

अंतिम क्षण

अंतिम क्षण

थी आशाये जो अब ||
निराशा की ओर बढ़ रही है ॥
उम्र अब बुढ़ापे में ढल रही है ॥
देखने का तजुर्बा आँखों ने ॥
कम कर दिया है ॥
कानो ने अपनी पहिचान ॥
बदल दिया ॥
बढ़ा के कदम नहीं चल सकता ॥
अब साँसे उखड रही है ॥
बाजुओ की ताकत का सूर्य ॥
अस्त हो चला है ॥
दिमाग की सोच ही सोचने में ॥
कम पड़ा है ॥
मौत का इन्तजार है परछाईया ॥
हंस रही है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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