जिंदादिली

तुम्हारी राह जोहती
मैं थपककर सेकू चूल्हे पे रोटी
कच्चा मकान है
पक रहा पकवान है
जी भर कर खाना
छक कर खाना
खुश होकर खाना
अपनी छोटी सी दुनिया
की यह छोटी छोटी खुशियां ही
अपनी
जीवन में क्या घटित होगा
अगले पल
कोई न जाने
हम तो गरीब हैं
दिल के अमीर हैं
न अगला सोचे न
पिछला
जिंदादिली से
हर एक पल को जिये
अपने छोटे से जीवन की तो
यही जमा पूंजी
यही खजाना
यही अपना
सच होता सपना।

मीनल

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