बचपन का सफर

बचपन का सफर

दुख क्या होता है
एक बच्चे ने पूछा
सुख क्या होता है
एक बच्ची ने पूछा
हम बच्चों को या तो
हंसना आता है या रोना
सुबह सुबह जगना
खेलना कूदना पढ़ना
शरारतें करना
खाना, खिलाना
रात को थकहार कर
गहरी नींद सो जाना
हमारा तो यही जीवन है
मस्त मलंग
उमंग तरंग के उन्माद से
भरा
कंधे पे बस्ते का बोझ है
पर दिल का दर्पण एकदम
स्वच्छ, साफ सुथरा और
नेक है
न दोस्ती, न दुश्मनी
न किसी से कोई भेदभाव
न कोई धर्म, न कोई
जाति के बंधन
बनाकर एक टोली
गली गली घूमे सब
हाथ हिलाते
कदम बढ़ाते
घर से पाठशाला
पाठशाला से घर
खेलकूद मस्ती करते बेफिक्र
यही हम बच्चों के
जीवन की डगर
बचपन का सफर।

मीनल

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