पत्र पेटी और आजकल का प्रेम

पत्र पेटी और आजकल का प्रेम

सड़क के किनारे खड़ी

एक पत्र पेटी

चलते फिरते राहगीरों से

गुजारिश कर रही कि

न जाने कितने बरसों से मैं

यूं ही खाली पड़ी हूं

किसी काम की नहीं

बेकार खड़ी हूं

मुझे इस्तेमाल करो

मेरी झोली सिर से पांव तक

प्रेम पत्रों, लिफाफों आदि से

भर दो

सुबह और शाम दोनों समय

उन पत्रों की निकासी होती है

लेकिन आज के युग में

मैं गले तक भरती ही नहीं

वर्तमान में प्रेम का स्वरूप

कैसा है

यह मेरी समझ से बाहर है

प्रेम की डिलीवरी क्या तत्काल

होने लगी है

यह अब फाइनल होने में

या अंतिम अवस्था या पड़ाव तक पहुंचने में

तनिक भी समय नहीं लेता

क्या एक आंख में पड़ा तिनका

सहज भाव से

बिना पलकें झपकाये ही

निकल जाता है

इसे किसी हवा के चलने की

या पानी के छींटे मारने की

कोई जरूरत ही नहीं

क्या बिना नजरें मिलाये

दिल मिलाये

इश्क हो जाता है

इसे किसी प्रेम की पाती में

प्रेम संदेश लिखकर

अपने प्रेमी तक पहुंचाने की

अब कोई जरूरत नहीं

अरे कैसा है यह आजकल का

प्रेम जो

मेरी सहायता के बिना

सम्भव हो पाता है

मुझे भी दिखाओ

मुझे आज के

प्रेमी प्रेमिकाओं से भेंट

करवाओ

जरा मुझे समझाने दो

उन्हें प्रेम का अर्थ

प्रेम का भाव

प्रेम की परिभाषा

प्रेम पत्र पे प्रेम का रस

बरसाता प्रेम का रंग

प्रेम का संग

प्रेम की तरंग

प्रेम की अनुभूति

प्रेम से मिलन

प्रेम से प्रेमपूर्वक

जीवनपर्यन्त जुड़ते,

बरतते, निभते रिश्तों का

अमित प्रेम के सम्बन्धों का

प्रेम भरा सफर।

मीनल

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