हंसती हो इतना

हंसती हो इतना

नगमये दिल हंसती हो इतना ॥
लेके गम का वजन आधा आधा ॥
नींद दोनों को नहीं आती है ॥
आगे राहो में दिखता है काँटा ॥
नगमये दिल हंसती हो इतना ॥
लेके गम का वजन आधा आधा ॥

अब तो विशवास होता नहीं है ॥
चर्चा गलियो में होती है ज्यादा ॥
रब जाने अब आगे क्या होगा ॥
लगता लोगो का गड़बड़ इरादा ॥
अब इलाके में रहना है मुशिकल ॥
प्रेम का खुल गया है लिफाफा ॥
नगमये दिल हंसती हो इतना ॥
लेके गम का वजन आधा आधा ॥

मैंने देखा था उनको वहा पर ॥
पूछ बैठो न देखा कहा पर ॥
सच बताने में मै भी हूँ डरता ॥
प्यार करता हूँ तुमसे जो ज्यादा ॥
नगमये दिल हंसती हो इतना ॥
लेके गम का वजन आधा आधा ॥
माग लो हंस के दिल चीर दूंगा ॥
वजन तुमसे रहेगा मेरा ज्यादा ॥
नगमये दिल हंसती हो इतना ॥
लेके गम का वजन आधा आधा ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

No votes yet.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

This Post Has 2 Comments

  1. नमन

    Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
    Please wait...
  2. ji hardik abhaar

    No votes yet.
    Please wait...

Leave a Reply

Close Menu