बढ़ रहा आकार

बढ़ रहा आकार

नीली नीली आँख तुम्हारी ॥
पीला कुर्ता सलवार ॥
आयी बसंत चली पुरवायी ॥
बदल गया व्यवहार ॥
अब तो नैना चंचल लगते ॥
हुमस रही है कलिय़ा ॥
होठ हंसी को संग उड़ाता ॥
गाल पे छायी ललिया ॥
तुम भी अबतो ताजुब करती ॥
जो बढ़ रहा आकार ॥
नीली नीली आँख तुम्हारी ॥
पीला कुर्ता सलवार ॥
आयी बसंत चली पुरवायी ॥
बदल गया व्यवहार ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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