एक तितली सी

एक तितली सी

मैं सूरज की एक किरण
फूल की एक पंखुरी
कंचई नीले समुंदर सी गहरी
मेरी आंखें
सुनहरे घुंघराले बाल
चमकीली सोन मछली सी मेरी चाल
बाहें मेरी चंदन सी दमकती
लब पे गुलाब की कलियां
बिखरती
एक प्लास्टिक की गुड़िया भी
फीकी पड़े मेरे अनुपम सौंदर्य के
सामने
दर्पण टूट जाये
जो मेरी मासूमियत
बिजली गिराये इसके
घर के आगे
किसी की उजड़ी दुनिया बस जाये जो
किसी की बगिया में
पंख फैलाकर मैं एक तितली सी
बैठ जाऊं
उसकी पेड़ की डाली से अभी अभी उगे एक फूल पे।

मीनल

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