सरलता

सरलता

मैं एक बादल का टुकड़ा
मैं एक बर्फ का मुखड़ा
सफेद संगमरमर सा
तन है मेरा
मन मेरा इतना सरल
जैसे अभी अभी
ब्याही हो कोई
भोली सी बछिया
यह दुनिया उसके लिए
अनोखी है
न वो कुछ खा पाये
न चलफिर पाये
एक खुले आकाश के नीचे
अपनी काया को समेटे
वो तो अपनी मां की
राह ताकती
हरी दूब के बिछौने पे बैठी है
वो तो न भगवान को
जाने
न ही किसी इंसान को
पहचाने
न खुद को समझे
न खुद को घेरे
प्रकृति के सम्मोहन को
साधे
जमीन से आसमान तक
वो तो है एक सीधी
लकीर सी
दुनिया की विडम्बनाओं
राजनीति के दाव पेचों
जीवन की कठिनाइयों को
वो न जाने
वो तो सरलता से
जन्मी
सरलता से जीवन जिये
और सरलता से मर
जाये
लेकिन सरलता
उसके खुद के लिए तो नहीं
पर लोगों की आंखों में
किरकिरी की तरह चुभ जाये
उसके जीने की एक
दुविधा बन जाये
जहर बन जाये
अभिशाप बन जाये।

मीनल

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