सच्चा प्रेम करो

सच्चा प्रेम करो

सच्चा प्रेम करो ॥
जागे नहीं निराशा ॥
न टूटे विश्वास का बंधन ॥
बंधी रहे यूं आशा ।।
प्रेम पथिक तुम पर ॥
तन मन करे न्यौछावर ॥
उसके नाम की रचती रहो ||
तुम भी सदा महावर ||
संयोग चले संग संग ॥
बजे ख़ुशी का बाजा ॥
न टूटे विश्वास बंधन ॥
बंधी रहे यूं आशा ।।
हंसी ख़ुशी से पल कट जाये ॥
किलकारी जब गूंजे ॥
समय चक्र चलता रहेगा ॥
क्रोध कभी न फूटे ॥
हर एक रात निराली होगी ।।
पूरी होगी अभिलाषा ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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