हलचल मची चमन में

हलचल मची चमन में

आते बसंती मौसम में ॥
उमंग जग गयी है ॥
लगता है मुझको उससे ॥
लगन लग गयी है ॥
हवाओ के झोंको संग ॥
बहने लगी हूँ ॥
कलियाँ है निखरी ||
खिलने लगी हूँ ॥
दिल कह रहा है ॥
उमर हो गयी है ।।
आँखे इशारो में ॥
कुछ बक रही है ॥
पाँव की पायलिया ||
झम झम बज रही है ॥
अब तो चमन में ॥
हलचल मच गयी है

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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